मैं मोबाइल कीपैड पर लिख लिख कर बैकस्पेस दबाता जा रहा था। जो कुछ लिखता वो सब कुछ मिट जाता , सोचता हूँ जब तुम्हे खत लिखा करता था तो कितनी दफा लिख कर काट देता, पन्ने बदल देता, नये शब्दो को चुनता, कुछ यादें बुनता... पर वो सारे शब्द बेकार पड़े होते थे, पर कभी मिटते नही। उन मासूम से शब्दो को पढ़ कर हंसता कि अच्छा हुआ जो खत तुम्हे भेजा वो यह नही था। वरना तुम भी कहती अलग होने के बाद भी मैं क्यूँ अपने जले दाल का जिक्र कर रहा, क्यूँ अपने लेट उठने पर खुद को कोस रहा। चाय के कप फिर टूट गये, लापरवाह मैं, आज नल खुला छोड़ ऑफिस निकल गया। अंततः एक अच्छा सा पत्र लिखता जिसमे बस पूछता की तुम कैसी हो? अपना ख्याल रखना। ना तुम पूछती की मैं कैसा हूँ, ना मैं कहता की " मैं ठीक नही हूँ , लतिका"। मैं कैसे ठीक रह सकता हूँ, तुम्हारे बिना। ये घर, ये खिड़कियां, ये दरवाजे, सोफा, कुशन, पर्दे सब उदास है... सब के सब। इन सब पर जब तुम अपने नर्म हाथ फेरती , ये खिलखिला कर कैसे हंस दिया करते थे।
जानता हूँ, तुम फिर कहोगी वक़्त सब कुछ बदल देगा "नीरव".. थोड़ा वक़्त दो। पर मैं जानता हूँ, वक़्त खुद तो बदल जा रहा पर कुछ भी नही बदल रहा। वक़्त हर दिन धोखे में रख रहा मुझे। जब उस सुबह किचन से बर्तन के टकराहट की आवाज नही आयी थी तो मैं दौड़ कर भागा था... रूम से बालकनी, बालकनी से रूम ...यु ही भागता फिर रहा था। वही बेचैनी , वही टीस आजतक महसूस करता हूँ, जैसा पहली दफा तुमसे बिछड़ने पर किया था।
मोबाईल के समय में भी मुझे खत लिखना पसन्द था। जब स्याही पन्नो को रंग रही होती है तो एक अजीब सा शुकून मिलता है। मैं एक एक शब्दो में अपने प्यार को दर्ज कर रहा होता हूँ। ताकि, जब तुम इसे पढ़ो तो शायद तुम भी ठीक वैसा ही महसूस करो, जैसा मैं कर रहा होता हूँ। हां ,शायद यह मेरा स्वार्थ है, क्योकि मैं चाहता हूँ तुम वापस लौटो और हौले से कहो- नीरव कुछ भी नही बदला। मैं आँखे खोलू और पाऊँ तुम्हारे घुटने पर खुद को पड़ा हुआ। तुम मेरे बालों को सहलाते हुये कहो- चाय पिओगे।
लतिका, लतिका, लतिका.....ओह्ह
मैं अपने कीपैड पर यह क्या टाइप करने लगा........
बैकस्पेस... कुछ भी नही बचा...
स्क्रीन पर फिर सुनापन छा गया, ठीक इस घर की तरह...ठीक मेरे जिंदगी की तरह..... फिर एक उदासीपन ... मुझसे इस मोबाइल पर कुछ भी नही लिखा जायेगा।
तुम ठीक कहती थी, मैं आधुनिक शरीर में पुरानी आत्मा हूँ।
यह सोच कर मै खत लिखने बैठ गया.....
प्रिय लतिका...

No comments:
Post a Comment